एहसास

कुछ थोड़ी दूर का सफ़र था ,
वो बोल रही थी ,मैं चुप था ।

दिल मिले महीनों गुजर गये थे ,
नज़रों का आमने सामने टकराना ,
पहली बार हुआ था ।

उसके बिलकुल साथ चलने की कोशिश में,
कभी पीछे रह जाता,कभी आगे निकल जाता ।

सड़क पार करते वक़्त दिल ने कहा ,
थाम लूँ उसे पर हाथों ने हिम्मत नहीं दिखाई ।
“वो पर्स संभालती हुई उस पार गयी,
मैं बेचैनियों को ”

इक दूकान पर कुछ खरीदते वक़्त ,
मैं ठीक उसके पीछे था।
ख़याल था दिमाग में की वो मेरी तरफ घूमे और
मैं गले लगा लूँ उसे ।
उसके कान बिलकुल मेरी धडकनों तक आते और
वो सुन पाती खुद के नाम को ।

उसका अचानक कहना “तुम कुछ ज्यादा लम्बे नहीं हो ”
मुझे ख्यालों की दुनिया से बाहर ले आया ।

तेज हवा के झोंकों के बीच लौटते वक़्त ,
ये महसूस हुआ की
कुछ रिश्तों के नाम एहसास होते है ।

#‎Abvishu‬

One thought on “एहसास

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s