Wired and Wireless Love Story

कह कर की जाओ दुनियादारी के काम संभालों ,
वो रोज़ सुबह सात बजे ख्वाबों में अलविदा कहती है ।

मेरे जागते ही दुखी हो जाता है मोबाइल मेरा
उसे भी तो अब जुदा होना पड़ेगा चार्जर से ।

फिर दोनों साथ सफ़र पे निकल जाते है ज़िन्दगी के ।
उसकी बैटरी भी मेरी थकान के साथ साथ घटती जाती है ।

याद उसे भी आती है मेज पर पड़े चार्जर की ।
याद हमें भी आती है मेज पर रखी उस तस्वीर की ।

शाम होते होते गुस्से से लाल हो जाता है मोबाइल ।
कहता है मैंने खुद में सहेज रखा है उस तस्वीर को
जो मेज पर रखी है ।
तुम क्यूँ मेरी धडकनों को मेज पर छोड़ आये ।

अब वो खफा हो बात भी नहीं कर रहा मुझसे …शायद उसे नहीं पता शाम मुझे भी जल्दी है उस कमरे तक पहुँचने की ।

रात सिरहाने उन दोनों को मिला जब ख्वाबों के तकिये पे सोता हूँ ।
दिलों के तार जोड़ने वो भी चली आती है ।

एक पुरे दिन की थकन,
नींदों में जग कर मिटाता हूँ  ।
#Abvishu

हमारी मैगी

एक 10 रुपये की मैगी को
4 दोस्त
रात 2 बजे 1 साथ
मिल के खाते थे।

कॉलेज के उन सालों में ,
हम भूख मिटाने को नहीं ।

साथ निभाने को खाते थे ।।
#Abvishu

Paani .. FabFive by Vishal

आसमान से धरती की तरफ पलटती बूँदें हो या किसी नल से टपकती .. इक संगीत होता है पानी की बूंदों में । आज विश्व जल दिवस है .. यह दिन है जल के महत्व को जानने का.. जल ही जीवन है, जल के बिना जीवन की कल्पन…

Source: Paani .. FabFive by Vishal

हम जीत गये ।

                
                 

और फिर उसने कहा ठीक से जाना ।
ट्रेन का खाना ज्यादा मत खाना ।

फ़ोन चार्ज रखना मैं फ़ोन करुँगी ।
और ज्यादा मत सोचना ।

थोड़ी देर बाद ट्रेन में बैठा मैं ,
इन्टरनेट नेटवर्क ढूँढ रहा था ।
भारत का क्रिकेट मैच नहीं देख पाने के ग़म ने,
मुझे उदास कर रखा था ।

उसे बता भी नहीं पाया था की मैच है आज ,
हर बार की तरह फिर गुस्सा जो हो जाती ।

जब घंटो तक स्कोर का पता न चला तो,
मैं जाकर ऊपर वाली बर्थ पर सो गया ।

अचानक उसका पसंदीदा गाना बजा
और
मैंने फ़ोन उठाया ।
सोचा कह देता हूँ उससे की मैं उदास हूँ ।
मैच तो नहीं देख पाया और
स्कोर का भी पता नहीं ।

कह पाने की हिम्मत जुटा ही रहा था
की
उधर से आवाज़ आई ।

” हम जीत गये ”

उस दिन सिर्फ भारत नहीं जीता था ।।

#Abvishu

एहसास

कुछ थोड़ी दूर का सफ़र था ,
वो बोल रही थी ,मैं चुप था ।

दिल मिले महीनों गुजर गये थे ,
नज़रों का आमने सामने टकराना ,
पहली बार हुआ था ।

उसके बिलकुल साथ चलने की कोशिश में,
कभी पीछे रह जाता,कभी आगे निकल जाता ।

सड़क पार करते वक़्त दिल ने कहा ,
थाम लूँ उसे पर हाथों ने हिम्मत नहीं दिखाई ।
“वो पर्स संभालती हुई उस पार गयी,
मैं बेचैनियों को ”

इक दूकान पर कुछ खरीदते वक़्त ,
मैं ठीक उसके पीछे था।
ख़याल था दिमाग में की वो मेरी तरफ घूमे और
मैं गले लगा लूँ उसे ।
उसके कान बिलकुल मेरी धडकनों तक आते और
वो सुन पाती खुद के नाम को ।

उसका अचानक कहना “तुम कुछ ज्यादा लम्बे नहीं हो ”
मुझे ख्यालों की दुनिया से बाहर ले आया ।

तेज हवा के झोंकों के बीच लौटते वक़्त ,
ये महसूस हुआ की
कुछ रिश्तों के नाम एहसास होते है ।

#‎Abvishu‬