Remembering Rafi Sahab

On #RafiSahab Birth Anniversary 

अभी साज़-ए-दिल मे तराने बहुत है 
अभी ज़िन्दगी के बहाने बहुत है 

दरे गैर पर भीख मांगो ना फन की 
जब अपने ही घर मे खजाने बहुत है 

है दिन बदमाजकी के “नौशाद” लेकिन 
अभी तेरे फन के दीवाने बहुत है ||

गूंजते है तेरे नगमों से अमीरों के महल 
झोपड़ों मे भी गरीबों के तेरी आवाज़ है 

अपनी मौसिकी पे सबको फक्र होता है 
मगर “रफ़ी साहब ” आज मौसिकी को आप पर नाज़ है 

For Me listening to #MohammadRafiSahab is an addiction.Remembering The Legend “Mohd Rafi Sahab”Whose Voice Brought Life To Hundreds Of Melodies.

महफिलों के दामनो मे साहिलों के आस पास ,सदियों तक ये सदा गूंजेगी दिलों के आस पास

 

 

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